Posted on May 20, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
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नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक ‘बिगुल’
माओ त्से.तुड. और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में हुई चीनी क्रान्ति के बाद जिस मेहनतकश वर्ग ने अपना ख़ून-पसीना एक करके समाजवाद [...]
Filed under: आंदोलन, क्रांति, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबका, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, समाजवाद, सर्वहारा | Tagged: नवउदारवादी दौर, पूँजी का तर्क, मजदूरों का जीवन, समाजवाद | Leave a Comment »
Posted on May 10, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
(बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996)
कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय
पिछले दिनों `बिगुल´ को मुम्बई में रहने वाले एक मार्क्सवादी बुद्धिजीवी आत्माराम जी का एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने `बिगुल´ से प्रकाशित सामग्री की आलोचना प्रस्तुत करते हुए बहुत सारे सुझाव दिये हैं। चूँकि इस पत्र में [...]
Filed under: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जागरण, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, लेनिन, समाजवाद, सर्वहारा | Tagged: अर्थवाद, अर्थवादी, ट्रेडयूनियनवाद, नवउदारवादी दौर, पूँजीपति वर्ग के नवदौलतिये विचारक, पूँजीपति वर्ग के वफादार चाकर, मजदूरों का जीवन, वर्ग दृष्टिकोण, वामपन्थी | 1 Comment »
Posted on May 9, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
विशेष सम्पादकीय
(बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995)
आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेहद, बुनियादी और फौरी ज़रूरत है। बल्कि इस मामले में पहले ही देर हो चुकी है। बेहतर तो यह होता कि यह अखिल भारतीय पैमाने का, कम से कम साप्ताहिक, अख़बार होता जो सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में एक साथ छपता। [...]
Filed under: आंदोलन, आह्वान, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन सम्बन्ध, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जागरण, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, लेनिन, श्रमशक्ति, समाजवाद, सर्वहारा | Tagged: अर्थवाद, अर्थवादी, इमेजनिंग इण्डिया, ट्रेडयूनियनवाद, नवउदारवादी दौर, पूँजीपति वर्ग के वफादार चाकर, बेरोजगारी, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण, वामपन्थी, संसदीय, सट्टेबाज, सस्ती श्रमशक्ति, technorati | 1 Comment »
Posted on April 30, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
इलेक्शन नहीं ! इन्कलाब !
मेहनतकश भाइयो और बहनों! नौजवान साथियों!
15वीं लोकसभा का चुनाव चल रहा है! एक बार फिर हमसे चुनने को कहा जा रहा है. कोई 3 रुपया चावल देने की बात कर रहा है तो कोई 2 रूपया किलो चावल देने के दावे कर रहा है. कोई किसानों का सूद माफ़ करने की [...]
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