चीनी विशेषता वाले ”समाजवाद” में मज़दूरों के स्वास्थ्य की दुर्गति

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नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक ‘बिगुल’
माओ त्से.तुड. और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में हुई चीनी क्रान्ति के बाद जिस मेहनतकश वर्ग ने अपना ख़ून-पसीना एक करके समाजवाद [...]

कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय

(बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996)

कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय

पिछले दिनों `बिगुल´ को मुम्बई में रहने वाले एक मार्क्सवादी बुद्धिजीवी आत्माराम जी का एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने `बिगुल´ से प्रकाशित सामग्री की आलोचना प्रस्तुत करते हुए बहुत सारे सुझाव दिये हैं। चूँकि इस पत्र में [...]

एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत

विशेष सम्पादकीय
(बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995)
आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेहद, बुनियादी और फौरी ज़रूरत है। बल्कि इस मामले में पहले ही देर हो चुकी है। बेहतर तो यह होता कि यह अखिल भारतीय पैमाने का, कम से कम साप्ताहिक, अख़बार होता जो सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में एक साथ छपता। [...]

जनता की मुक्ति का रास्ता

इलेक्शन नहीं ! इन्कलाब !
मेहनतकश भाइयो और बहनों! नौजवान साथियों!
15वीं लोकसभा का चुनाव चल रहा है! एक बार फिर हमसे चुनने को कहा जा रहा है. कोई 3 रुपया चावल देने की बात कर रहा है तो कोई 2 रूपया किलो चावल देने के दावे कर रहा है. कोई किसानों का सूद माफ़ करने की [...]