Posted on May 15, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
(जून-जुलाई 1999, पी.पी. आर्य का पत्र)
बिगुल के लक्ष्य और स्वरूप पर जारी बहस : एक पत्र और उसका उत्तर
`बिगुल´ के अप्रैल 1999 अंक में हमने “`बिगुल´ के लक्ष्य और स्वरूप पर एक बहस और हमारे विचार” शीर्षक से एक सम्पादकीय छापा था।
इस सम्पादकीय पर हमें एक पत्र प्राप्त हुआ है। `बिगुल´ के पाठकों और वितरक-संवाददाता-सहायक [...]
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Posted on May 10, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
(बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996)
कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय
पिछले दिनों `बिगुल´ को मुम्बई में रहने वाले एक मार्क्सवादी बुद्धिजीवी आत्माराम जी का एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने `बिगुल´ से प्रकाशित सामग्री की आलोचना प्रस्तुत करते हुए बहुत सारे सुझाव दिये हैं। चूँकि इस पत्र में [...]
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Posted on May 9, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
विशेष सम्पादकीय
(बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995)
आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेहद, बुनियादी और फौरी ज़रूरत है। बल्कि इस मामले में पहले ही देर हो चुकी है। बेहतर तो यह होता कि यह अखिल भारतीय पैमाने का, कम से कम साप्ताहिक, अख़बार होता जो सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में एक साथ छपता। [...]
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Posted on April 16, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस की परम्परा आज भाँति-भाँति के नकली वामपन्थी मदारियों के हाथों किस कदर लांछित और कलंकित हो रही है। मई दिवस दुनिया के मज़दूरों के राजनीतिक चेतना के युग में – राजनीतिक संघर्षो के युग में प्रवेश [...]
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