चीनी विशेषता वाले ”समाजवाद” में मज़दूरों के स्वास्थ्य की दुर्गति

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नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक ‘बिगुल’
माओ त्से.तुड. और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में हुई चीनी क्रान्ति के बाद जिस मेहनतकश वर्ग ने अपना ख़ून-पसीना एक करके समाजवाद [...]

चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी!
बिगुल डेस्क
करीब डेढ़ महीने तक चली देशव्यापी चुनावी नौटंकी अब आख़िरी दौर में है। ‘बिगुल’ का यह अंक जब तक अधिकांश पाठकों के हाथों में पहुँचेगा तब तक चुनाव परिणाम घोषित हो चुके होंगे और दिल्ली की गद्दी तक पहुँचने [...]

लुटेरी पूँजीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ लम्बी लड़ाई की तैयारी में जुट जाओ!

जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है
पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं

विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावजूद विश्व पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का संकट गहराता ही चला जा रहा है। जंगल की आग की तरह फैलती मन्दी [...]

भारत की तरक्की के दावों की ढोल की पोल : समृद्धि के तलघर में नर्क का अँधेरा

नवउदारवादी अर्थनीति के 18 वर्ष
18 वर्षों पहले नरसिंह राव की सरकार ने जब उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों की शुरुआत की थी तो आज के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह तब वित्तमन्त्री थे। उन्होंने तब `ट्रिकल डाउन थ्योरी´ की पिपिहिरी बजाते हुए दावा किया था कि जब समाज के शिखरों पर समृद्धि आयेगी तो वह रिसकर नीचे तक पहुँच [...]