Posted on May 20, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
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नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक ‘बिगुल’
माओ त्से.तुड. और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में हुई चीनी क्रान्ति के बाद जिस मेहनतकश वर्ग ने अपना ख़ून-पसीना एक करके समाजवाद [...]
Filed under: आंदोलन, क्रांति, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबका, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, समाजवाद, सर्वहारा | Tagged: नवउदारवादी दौर, पूँजी का तर्क, मजदूरों का जीवन, समाजवाद | Leave a Comment »
Posted on May 19, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
मित्रवत साथियो,
क्या आप जानते हैं कि शोषण करने वाला शोषण सहने वाले से ज्यादा गुनहगार होता है। और सभी जानते हैं, शोषण सहने वाला अधिक परिश्रमी होता है और शोषण करने वाला ऐयाशबाज़ होता है और हवेली में आरामदेह जीवन बिताता है।
लेकिन ऐसा क्यों?
ऐसा सवाल एक नहीं है बल्कि बहुत अधिक संख्या में हैं। लेकिन [...]
Filed under: आह्वान, नव सर्वहारा पुनर्जागरण, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, शिक्षा, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, संघर्ष, सर्वहारा | Tagged: उत्पादन और उपभोग, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण, सर्वहारा | 1 Comment »
Posted on May 18, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
चेन्नई के सफाई कामगारों की हालत देशभर के
सफाईकर्मियों का आईना है
मशहूर भारतीय फ़िल्मकार सत्यजित रे ने अपनी एक फ़िल्म अमेरिका में प्रदर्शित की तो पहले शो में ही बहुत से अमेरिकी फ़िल्म बीच में ही छोड़कर आ गये क्योंकि सत्यजीत रे ने फ़िल्म के एक सीन में भारतीय लोगों को हाथों से खाना खाते [...]
Filed under: अनुराग, चर्चा है कि, बिगुल, मजदूर, ललकार, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, सर्वहारा | Tagged: इमेजनिंग इण्डिया, मजदूरों का जीवन, वर्ग दृष्टिकोण, सर्वहारा, सस्ती श्रमशक्ति | Leave a Comment »
Posted on May 17, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा
मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ घण्टे काम के दिन के लिए मज़दूरों के शानदार आन्दोलन से पैदा हुआ। उसके पहले मज़दूर चौदह से लेकर सोलह- सोलह घण्टे तक खटते थे। सारी दुनिया में अलग-अलग इस माँग को लेकर आन्दोलन होते [...]
Filed under: आह्वान, कम्युनिस्ट, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, संघर्ष, सर्वहारा | Tagged: पूँजीपति वर्ग के वफादार चाकर, मई दिवस, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़, सर्वहारा | 1 Comment »