(जून-जुलाई 1999, पी.पी. आर्य का पत्र)
बिगुल के लक्ष्य और स्वरूप पर जारी बहस : एक पत्र और उसका उत्तर
`बिगुल´ के अप्रैल 1999 अंक में हमने “`बिगुल´ के लक्ष्य और स्वरूप पर एक बहस और हमारे विचार” शीर्षक से एक सम्पादकीय छापा था।
इस सम्पादकीय पर हमें एक पत्र प्राप्त हुआ है। `बिगुल´ के पाठकों और वितरक-संवाददाता-सहायक [...]
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