Posted on May 9, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
विशेष सम्पादकीय
(बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995)
आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेहद, बुनियादी और फौरी ज़रूरत है। बल्कि इस मामले में पहले ही देर हो चुकी है। बेहतर तो यह होता कि यह अखिल भारतीय पैमाने का, कम से कम साप्ताहिक, अख़बार होता जो सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में एक साथ छपता। [...]
Filed under: आंदोलन, आह्वान, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन सम्बन्ध, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जागरण, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, लेनिन, श्रमशक्ति, समाजवाद, सर्वहारा | Tagged: अर्थवाद, अर्थवादी, इमेजनिंग इण्डिया, ट्रेडयूनियनवाद, नवउदारवादी दौर, पूँजीपति वर्ग के वफादार चाकर, बेरोजगारी, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण, वामपन्थी, संसदीय, सट्टेबाज, सस्ती श्रमशक्ति, technorati | 1 Comment »
Posted on April 16, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस की परम्परा आज भाँति-भाँति के नकली वामपन्थी मदारियों के हाथों किस कदर लांछित और कलंकित हो रही है। मई दिवस दुनिया के मज़दूरों के राजनीतिक चेतना के युग में – राजनीतिक संघर्षो के युग में प्रवेश [...]
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Posted on April 15, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
इस पोस्ट की प्रथम किश्त ..मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है!
आम मज़दूर साथियों के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वे राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक संघर्ष के बीच के अन्तर को भलीभाँति समझ लें। तभी उन्हें मई दिवस के ऐतिहासिक महत्त्व का वास्तव में भान हो सकेगा। किसी कारख़ाना या [...]
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Posted on April 3, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है
पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं
विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावजूद विश्व पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का संकट गहराता ही चला जा रहा है। जंगल की आग की तरह फैलती मन्दी [...]
Filed under: आंदोलन, आह्वान, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन सम्बन्ध, खाद्य संकट, नव सर्वहारा पुनर्जागरण, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मध्यवर्ग का ऊपरी तबका, मार्क्सवाद, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, सर्वहारा | Tagged: इमेजनिंग इण्डिया, चीखती-सच्चाईयां, बेरोजगारी, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़, मन्दी, वर्ग दृष्टिकोण, सस्ती श्रमशक्ति | Leave a Comment »