पूँजीपति के लिए मज़दूर सिर्फ मुनाफा पैदा करने का एक साधन है!
भारत सिर्फ अपने विशाल बाजार की वजह से ही पूँजीपति वर्ग को नहीं लुभा रहा है बल्कि उसकी विशालकाय सस्ती श्रमशक्ति भी उसे आकृष्ट कर रही है। जिस तरह कई मेमनों को देखकर भेड़िये की आँखों में खून और मुँह से लार [...]
Filed under: पुस्तकें, पूंजीवादी संकट, मध्यवर्ग का ऊपरी तबका, मार्क्सवाद, शोषण-उत्पीड़न, सर्वहारा | Tagged: इमेजनिंग इण्डिया, नंदन नीलेकणी, पूँजी का तर्क, पूँजीपति वर्ग के नवदौलतिये विचारक, पूँजीपति वर्ग के वफादार चाकर, मजदूरों का जीवन, मानव पूँजी, रोमन साम्राज्य, वर्ग दृष्टिकोण, सस्ता मानसिक श्रम, सस्ती श्रमशक्ति | Leave a Comment »
