नन्दन नीलेकणी की किताब के बहाने एक बार फिर उजागर हुई पूँजीपतियों की सोच

पूँजीपति के लिए मज़दूर सिर्फ मुनाफा पैदा करने का एक साधन है!
भारत सिर्फ अपने विशाल बाजार की वजह से ही पूँजीपति वर्ग को नहीं लुभा रहा है बल्कि उसकी विशालकाय सस्ती श्रमशक्ति भी उसे आकृष्ट कर रही है। जिस तरह कई मेमनों को देखकर भेड़िये की आँखों में खून और मुँह से लार [...]

वर्गीय समाज में औरत की दशा

कात्यायनी द्वारा लिखित ‘दुर्ग द्वार पर दस्तक’ पुस्तक के एक लेख “परिवार को बचाने के करूंन् क्रन्दन के खिलाफ
एक पत्र ” से