Posted on April 3, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है
पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं
विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावजूद विश्व पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का संकट गहराता ही चला जा रहा है। जंगल की आग की तरह फैलती मन्दी [...]
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Posted on March 30, 2009 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
नवउदारवादी अर्थनीति के 18 वर्ष
18 वर्षों पहले नरसिंह राव की सरकार ने जब उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों की शुरुआत की थी तो आज के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह तब वित्तमन्त्री थे। उन्होंने तब `ट्रिकल डाउन थ्योरी´ की पिपिहिरी बजाते हुए दावा किया था कि जब समाज के शिखरों पर समृद्धि आयेगी तो वह रिसकर नीचे तक पहुँच [...]
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Posted on October 27, 2008 by Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
‘आह्वान’ अक्टूबर-दिसम्बर २००८ से साभार
-अभिनव
वर्ष २००७ और २००८ कई मायनों में पूंजीवादी विश्व व्यवस्था के लिए काफी दिक्कततलब साबित हुए. जहाँ २००७ में पूंजीवादी विश्व के चौधरी अमेरिका की अर्थव्यवस्था एक जबर्दस्त वित्तीय संकट में फंसी (जिसमें वह अभी भी उबर नहीं सकी है), वहीं वर्ष २००८ ने पूंजीवाद का स्वागत भयंकर महंगाई, [...]
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