लुटेरी पूँजीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ लम्बी लड़ाई की तैयारी में जुट जाओ!

जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है
पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं

विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावजूद विश्व पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का संकट गहराता ही चला जा रहा है। जंगल की आग की तरह फैलती मन्दी [...]

भारत की तरक्की के दावों की ढोल की पोल : समृद्धि के तलघर में नर्क का अँधेरा

नवउदारवादी अर्थनीति के 18 वर्ष
18 वर्षों पहले नरसिंह राव की सरकार ने जब उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों की शुरुआत की थी तो आज के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह तब वित्तमन्त्री थे। उन्होंने तब `ट्रिकल डाउन थ्योरी´ की पिपिहिरी बजाते हुए दावा किया था कि जब समाज के शिखरों पर समृद्धि आयेगी तो वह रिसकर नीचे तक पहुँच [...]

खाद्यान्न संकट–पूंजीवाद का नया तोहफा

‘आह्वान’ अक्टूबर-दिसम्बर २००८ से साभार
-अभिनव
वर्ष २००७ और २००८ कई मायनों में पूंजीवादी विश्व व्यवस्था के लिए काफी दिक्कततलब साबित हुए. जहाँ २००७ में पूंजीवादी विश्व के चौधरी अमेरिका की अर्थव्यवस्था एक जबर्दस्त वित्तीय संकट में फंसी (जिसमें वह अभी भी उबर नहीं सकी है), वहीं वर्ष २००८ ने पूंजीवाद का स्वागत भयंकर महंगाई, [...]