मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन

मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा
मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ घण्टे काम के दिन के लिए मज़दूरों के शानदार आन्दोलन से पैदा हुआ। उसके पहले मज़दूर चौदह से लेकर सोलह- सोलह घण्टे तक खटते थे। सारी दुनिया में अलग-अलग इस माँग को लेकर आन्दोलन होते [...]

मई दिवस पर याद किया मज़दूरों की शहादत को

बिगुल संवाददाता
गोरखपुर
नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता और अखिल भारत नेपाली एकता मंच ने मिलकर अन्तरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाया और भारत एवं नेपाल की मेहनतकश जनता के भाईचारे को और मज़बूत बनाने का संकल्प लिया।
मई दिवस के दिन सुबह ही गोरखपुर की सड़कें “दुनिया के मज़दूरों एक हो”, “मई दिवस ज़िन्दाबाद”, “साम्राज्यवाद-पूँजीवाद का नाश हो”, [...]

चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी!
बिगुल डेस्क
करीब डेढ़ महीने तक चली देशव्यापी चुनावी नौटंकी अब आख़िरी दौर में है। ‘बिगुल’ का यह अंक जब तक अधिकांश पाठकों के हाथों में पहुँचेगा तब तक चुनाव परिणाम घोषित हो चुके होंगे और दिल्ली की गद्दी तक पहुँचने [...]

आप लोग कमज़ोर, छिछले कैरियरवादी बुद्धिजीवी हैं और `बिगुल´ हिरावलपन्थी अख़बार है!

(जून-जुलाई 1999, पी.पी. आर्य का पत्र)
बिगुल के लक्ष्य और स्वरूप पर जारी बहस : एक पत्र और उसका उत्तर
`बिगुल´ के अप्रैल 1999 अंक में हमने “`बिगुल´ के लक्ष्य और स्वरूप पर एक बहस और हमारे विचार” शीर्षक से एक सम्पादकीय छापा था।
इस सम्पादकीय पर हमें एक पत्र प्राप्त हुआ है। `बिगुल´ के पाठकों और वितरक-संवाददाता-सहायक [...]