एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत

विशेष सम्पादकीय
(बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995)
आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेहद, बुनियादी और फौरी ज़रूरत है। बल्कि इस मामले में पहले ही देर हो चुकी है। बेहतर तो यह होता कि यह अखिल भारतीय पैमाने का, कम से कम साप्ताहिक, अख़बार होता जो सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में एक साथ छपता। [...]

पूँजीवाद और मज़दूरों का प्रवास

पूँजीवाद में प्रवास
रोज़ी-रोटी तथा बेहतर जीवन के लिए इंसानों के एक जगह से दूसरी जगह प्रवास की परिघटना युगों पुरानी है। जब मानव समाज अभी वर्गों में विकसित नहीं हुआ था, उस समय भी इंसानी आबादी मैदानी इलाकों, उपजाऊ ज़मीनों, चरागाह तथा बेहतर सहनीय मौसम वाले इलाकों की तलाश में जहाँ-तहाँ अपने ठिकाने बदलते [...]

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! ..अंतिम किश्त

उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस की परम्परा आज भाँति-भाँति के नकली वामपन्थी मदारियों के हाथों किस कदर लांछित और कलंकित हो रही है। मई दिवस दुनिया के मज़दूरों के राजनीतिक चेतना के युग में – राजनीतिक संघर्षो के युग में प्रवेश [...]

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! …दूसरी किश्त

इस पोस्ट की प्रथम किश्त ..मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है!

आम मज़दूर साथियों के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वे राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक संघर्ष के बीच के अन्तर को भलीभाँति समझ लें। तभी उन्हें मई दिवस के ऐतिहासिक महत्त्व का वास्तव में भान हो सकेगा। किसी कारख़ाना या [...]